STORYMIRROR

Ramanpreet -

Inspirational

3  

Ramanpreet -

Inspirational

सुबह का मंज़र

सुबह का मंज़र

1 min
388

सुबह का ये मंज़र तो देखो

जैसे शर्म कि लाली ओढ़े आसमान,

कर रहा है मिलन कि बेला को बयान।

और बादलों के उस पार एक इन्सान,

कर रहा अपने अन्तर मन से मिलान।

है ये दोनों एक दूजे कि गहराइयों से अनजान,

पर दोनों ही पाने को है

एक नयी रोशनी एक नयी पहचान।


 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational