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RASHI SRIVASTAVA

Abstract

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RASHI SRIVASTAVA

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सतरंगी रंग

सतरंगी रंग

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देश हमारा प्यारा है सारे

जग से न्यारा है

होली के सतरंगी रंग की

बहती इसमें धारा है


विष्णु नाम जपे प्रहलाद मार

सके ना पिता भी जिसको

प्रभु का सर पे हाथ रहे जब

कोई छू भी सके ना उसको


प्रेम फैलाता खुशियां लौट

लुटाता हर इक लगता बंजारा है

होली के सतरंगी रंग की

बहती सुंदर धारा है I


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