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Subodh kumar Verma

Abstract

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Subodh kumar Verma

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स्त्री

स्त्री

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स्त्री

मैं जानता हूँ, आपको

आप सर्वोपरि हो।

आप एक योद्धा तो,

आप एक सृष्टिकर्ता हो।


आप मे बसती एक ब्राह्मण है।

आप माँ, काकी, दादी,भाभी तो

किसी का किस्मत का निर्माण हो।

कुछ चर्चाएँ होगी, आपकी आज

कही फेसबुक, व्हाट्सएप के साथ।


मैं जानता हूँ, आपको

हर इंसान में बसते हो, आप।

मैं जानता हूँ, आपको 

स्त्री हो, आप।


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