Prabhawati Sandeep wadwale
Abstract Horror
सपने का आसमान
रंगीन हो गया
लिखने का अंदाज सही
हो गया
मन मेंं शब्द के गणित
उपर नीचे
होने लगी
सपने का अंदाज
पुरे होने का
नहीं
फिर भी
मन मेंं उमीद
भगवान जरुर
मेरी मेहनत देखकर
बोले गा हे ले तुम
तुम्हें जो चाहिए।
अजनबी
अहसास
बाबा
पिताजी
बाबा आपकी याद...
लडकी
दोस्ती
पाने के लिए क...
मनुष्य
तकदीर बनाने क...
चेहरे पे उदासी ले के घंटों तक सामने बिठाया उसने चेहरे पे उदासी ले के घंटों तक सामने बिठाया उसने
इक कतरा दिल का इश्क़ से टकरा गया हुआ फिर क्या मुहब्बत वही, अफसाने प्यार के इक कतरा दिल का इश्क़ से टकरा गया हुआ फिर क्या मुहब्बत वही, अफसाने प्यार...
शान, सब में में घुल मिल जाता, रंग ढंग है मेरा निराला। शान, सब में में घुल मिल जाता, रंग ढंग है मेरा निराला।
तलाशने को खुशिया, पर मिलता हैं क्या,जाना भी है खाली हाथ।। तलाशने को खुशिया, पर मिलता हैं क्या,जाना भी है खाली हाथ।।
दौड़ते रहिए जिंदगी की दौड़ मे क्योंकि, हारने के बाद लोगों के रुझान बदल जाते हैं। दौड़ते रहिए जिंदगी की दौड़ मे क्योंकि, हारने के बाद लोगों के रुझान बदल जाते ह...
समय बदलते देखा है मैंने, समय के साथ बदलते रिश्तों को देखा है मैंने।। समय बदलते देखा है मैंने, समय के साथ बदलते रिश्तों को देखा है मैंने।।
और कुछ नया कर पाते, और इस जहां का भला कर जाते। और कुछ नया कर पाते, और इस जहां का भला कर जाते।
क्यो फ़सीलें टूट जाती है यहाँ पर यार अक्सर रूठ जाता है यहाँ पर। क्यो फ़सीलें टूट जाती है यहाँ पर यार अक्सर रूठ जाता है यहाँ पर।
सतर्क करने को कहती है, तो भी आप जिंदा हैं। सतर्क करने को कहती है, तो भी आप जिंदा हैं।
कोई भी मरता नहीं है, किसी की अर्थी के संग। किश्ती तेरी ले डूबेगी, महफिलें ऐसी तुम्हारी कोई भी मरता नहीं है, किसी की अर्थी के संग। किश्ती तेरी ले डूबेगी, महफिलें ऐसी...
चढ़ गये जो हंस कर सूली, खाई जिन्होंने सीने पर गोली । चढ़ गये जो हंस कर सूली, खाई जिन्होंने सीने पर गोली ।
खुश थी मैं जब तू साथ था... जी गई मैं जब तू साथ था.. खुश थी मैं जब तू साथ था... जी गई मैं जब तू साथ था..
फ़िर से तेरी आँखों को, ये आँखें तकने लगती है। फ़िर से तेरी आँखों को, ये आँखें तकने लगती है।
बाइज्ज़त बरी होना उस रिश्ते से, तू भी ले सीख। बाइज्ज़त बरी होना उस रिश्ते से, तू भी ले सीख।
सपनों के पुरुष के समान है अंधकूप में गिरा व्यक्ति। सपनों के पुरुष के समान है अंधकूप में गिरा व्यक्ति।
व्याकुल, व्यग्र हुआ जब मन, हताश होकर भटक रहा जब तन, व्याकुल, व्यग्र हुआ जब मन, हताश होकर भटक रहा जब तन,
वो ख़ुदा है लेगा पाई - पाई का हिसाब, हम जो करके अपनी करामात भूल जाते हैं। वो ख़ुदा है लेगा पाई - पाई का हिसाब, हम जो करके अपनी करामात भूल जाते हैं।
लाख बुरा कह लो झेल जाते हैं वो कहते नहीं फिर भी कुछ कह जाते हैं। लाख बुरा कह लो झेल जाते हैं वो कहते नहीं फिर भी कुछ कह जाते हैं।
प्रेम और आत्मा दोनों एक ही है। प्रेम और आत्मा दोनों एक ही है।
बनाते फिरते हैं रिश्ते ज़माने भर से अक्सर मगर घर में ज़रूरत हो तो रिश्ते बोल जाते हैं ! बनाते फिरते हैं रिश्ते ज़माने भर से अक्सर मगर घर में ज़रूरत हो तो रिश्ते बोल ...