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Surendra kumar singh

Abstract

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Surendra kumar singh

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समय का अखबार

समय का अखबार

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समय का अखबार

एक रहस्यमय दर्पण है।

समय एक यथार्थ

हमारे ऊपर एक दबाव

एक स्पर्श


एक आकर्षण

जिसमें डगमगाते हुये हम

ठीक ठीक आप की तरह।


हमसफ़र,हम आवाज

इस प्रतिक्रियावादी दौर का

सारा का सारा माहौल।


मसलन धर्म जैसा धर्म

राजनीति जैसी राजनीति

और कैमोफलेजेज

इन दी वे ऑफ सिविल अड्मिनिस्ट्रेसन।


रहस्यमय दर्पण पर पड़ती हुयी

अदृश्य हलचलों का परावर्तन लगता है

लगता है समय के अखबार का दर्पण

अपने ऊपर पड़ते प्रकाशपुंजों की

नियोजित नियति परावर्तित करता है।


समय का अखबार

एक रहस्यमय दर्पण है

दर्पण का उद्देश्य

एक क्रिया पूरी की पूरी

तांत्रिक क्रिया पर एक प्रतिक्रया

और उसमें से निकलता हुआ

एक सम्मोहक प्रकाशपुंज


रहस्यमय दर्पण से टकराकर

एक उल्टी तस्वीर बनाता है

हम डगमगाते हुये दिखते हैं

हब दबे हुये दिखते हैं।

समय का अखबार

एक रहस्यमय दर्पण है


समय एक यथार्थ

हमारे आस पास

एक साझा समझ हमारे आस पास

एक बदलाव की कशमकश

हमारे आस पास


एक चाहत हमारे आस पास

एक संकल्प हमारे आस पास।

समय का अखबार

एक रहस्यमय दर्पण है


और उसके प्रत्यावर्तित प्रकाश में

नहाए हुये हम उसको पढ़ते हैं।


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