समर्पण भाव "एक सुकून "
समर्पण भाव "एक सुकून "
हेलो दोस्तों .....एक छोटी सी कविता लेकर आई हूं आप सब के लिए जो ईश्वर के प्रति "समर्पण भाव" के "सुकून "को दर्शाता है।
उम्मीद है आपको ये लेख जरूर पसंद आए
तो चलिए
कभी मन परेशान रहने लगे न तो एक बहुत सुंदर भाव है, जो हमेशा अपने मन में लेकर
आओ और कृष्ण भगवान से कहो कि..... हे कृष्ण! जब मैं सोचती हूँ कि आपने मेरे बारे में कुछ अच्छा ही सोचा होगा।
तो बड़ा सुकून सा मिलता है.........।
क्योंकि आप तो मेरे गुण-अवगुण जानते ही हो, इस दुनिया को क्या पता कि मेरे जीवन में क्या चल रहा है ।
लेकिन जब मैं सोचती हूँ कि आपको तो सब पता ही है तो बड़ा सुकून सा मिलता है...............।
खड़ी हूँ आपकी ही अदालत में दे दो जो सज़ा देनी है। आप जो सज़ा दोगे, वो मुझे मंजुर है क्योंकि मैं अच्छी तरह जानती हूँ कि आप उतनी ही सज़ा दोगे जितना मेरा कसूर होगा।
दुनिया की तरह नहीं की मुझे एक ही गलती के लिए बार-बार परेशान करेंगे और जब मैं सोचती हूँ कि सज़ा देने वाले आप ही हो .......
तो बड़ा सुकून सा मिलता है...........।
लोगों को पल-पल बदलते देखती हूँ ......
धोखा देते हुए देखती हूँ ....
झूठ बोलते हुए देखती हूँ, लेकिन जब सोचती हूँ कि जब आप बदलने लगते हो तो लोगों के मुकद्दर ही बदल देते हो.....
तो बड़ा सुकून सा मिलता है.......।
जिन्दगी की दौड़ में जो लोग हमें दौड़ कर नहीं हरा सकते वो हमें तोड़कर हराने की कोशिश करते है लेकिन जब सोचती हूँ कि जोड़ने वाले आप बैठे हो तो बड़ा सुकून सा मिलता है.........।
हे कृष्ण! मेरा सब कुछ आप ही को समर्पित है क्योंकि जब पता चला कि जीवन की नईया के खेवईया भी आप ही हो तो बड़ा सुकून सा मिलता है...........।
किसी और को क्या माने कब वो छल जाए मुझे, आप ही तो सब कुछ है मेरे क्योंकि पता है हमें आप कभी भी अपने से दूर नहीं करेंगे तो बड़ा सुकून सा मिलता है ..........।
दुनिया पर विश्वास करके पछताएं लेकिन जब आप पर विश्वास कर लिया तो बड़ा ही सुकून सा मिला तब पता चला कि फरेब है दुनिया, बस अपने केवल अपने "हित" करने वाले आप ही हो तो मन को बड़ा सुकून सा मिलता है.........।।
जय श्रीकृष्ण राधे-राधे......
