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Pratima Yadav

Abstract Others

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Pratima Yadav

Abstract Others

मन के सवाल

मन के सवाल

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मन ही मन में शोर हुआ,
मन ही मन में एक नई सवेरा का भोर हुआ।

मन ही मन में सोचते रहे,
अब मन इतना क्यों भावविभोर हुआ?

जब मन ही मन से लगन हुई,
तब मन ही मन इतना क्यों व्यथित हुआ?

ये मन की लगन अपने प्रियवर से कितना बैचेन किया,
न दिन का पता रहा न रात को चैन,
बस मन ही मन ने विचार विमर्श किया।


अब न पहले जैसे वो बात रही ना पहले जैसे वो हालात।
अब अपना ही मन सोच सोच कर डर सा गया।

मन ही मन में उलझ गया, 
हजारो सवाल बस मन में अब घर कर गया।


                     ......Pratima ✍️✍️✍️



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