सियाराम के दोहे
सियाराम के दोहे
जीवन में सब देखते, पुण्य करो या पाप।
हरि को नहीं बिसारिये, भजिये उनको आप।।
सियाराम मेरे करें, उर में सदा निवास ।
मुझ जैसे नादान को, बना दिया है खास ।।
चिंता सारी काटिये, ऐ दशरथ के लाल।
चरण शरण में लीजिये, कर दो मुझे निहाल।।
राम राम कहता रहूँ, यह मन में अभिलाष।
राम शरण में ही रहूँ , जीवन की यह आस।।
कह 'सुओम' कैसे मिले, दीनबंधु दातार।
कण कण में वो ही बसे, जिनसे हमको प्यार।।
