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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Abstract

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मानव सिंह राणा 'सुओम'

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सियाराम के दोहे

सियाराम के दोहे

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जीवन में सब देखते, पुण्य करो या पाप।

हरि को नहीं बिसारिये, भजिये उनको आप।।


सियाराम मेरे करें, उर में सदा निवास ।

मुझ जैसे नादान को, बना दिया है खास ।।


चिंता सारी काटिये, ऐ दशरथ के लाल।

चरण शरण में लीजिये, कर दो मुझे निहाल।।


राम राम कहता रहूँ, यह मन में अभिलाष।

राम शरण में ही रहूँ , जीवन की यह आस।।


कह 'सुओम' कैसे मिले, दीनबंधु दातार।

कण कण में वो ही बसे, जिनसे हमको प्यार।।


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