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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

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Vijay Kumar parashar "साखी"

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सिवा तेरे

सिवा तेरे

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कुछ भी अच्छा नहीं लगता है सिवा तेरे

ये दिल भी पराया लगता है सिवा तेरे


ये कैसा जादू तूने कर दिया है,सनम

ये जिंदगी भी अधूरी लगती है सिवा तेरे


कैसे अपनी मोहब्बत को बयां करूँ

ये मेरा दिल नही धड़कता है सिवा तेरे


मेरे लिए तो जीना भी मरना ही होगा

गर मुझे जीना पड़ेगा सनम सिवा तेरे।


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