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JAI GARG

Abstract

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JAI GARG

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सिरफिरा (log 17)

सिरफिरा (log 17)

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पागल हूँ शायर भी मैं तुम्हारे लिए

बंद किताब का पन्ना


अगर खो जाऊँ तो ख्वाबों में ही

हमें कभी याद करना


तमन्ना थी कि रूबरू होकर

तुम से कुछ गुफ़्तगू करूँ


कमरे में किताबें हैं

अकेला भी तुम्हारा अता पता नहीं !


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