STORYMIRROR

Sarswati Aarya

Inspirational

4  

Sarswati Aarya

Inspirational

सिपाही

सिपाही

1 min
412

मातृभूमि के वीरों से देश आबाद रहा

पर हमें देश कब याद रहा

सिपाही आतंक से लड़े

वे लड़ गये और मर गये

जो दिलों से हिंदुस्तानी थे

उन्हें हम हिंदू ,मुस्लिम कर गये

सिपाही आतंक वाद से लोहा ले

कर भ्रष्टाचार हम देश को धोखा दें

वो तिरंगे को सलामी दें

हम वर्क्षों को नीलामी दें

बिन राखी की कलाई से

वो हर बहना का सम्मान करें

पर कुछ ऐसी भी कलाई हैं

जो बहना का अपमान करें

उनका कोई भी सगा नहीं

बल्कि हिंदुस्तानी ही संबंधी है

हम लड़े बन हिंदू ,मुस्लिम 

हमारी धर्मों से पाबन्दी है

हम सबके लिए सिपाही लड़ा

तिरंगे को कफ़न बना लाया

हम फिर भी स्वार्थी बने रहे

आँख का आंसू भी न बह आया

हर हिंदुस्तानी तुम्हारा कर्जदार

तुम्हीं भारत के हो रखवाले

सिपाही

तुम्हारी जय - जय कार, तुम्हारी जय - जय कार



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational