गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न
Inspirational
(2122 -2122,2122 -2121)
पूर्व जन्मों से मिला था, योग्यता तुमको महान ।
दिव्य मणि अब खो चुका है,रो रहा है फिर जहान ।।
देवता भी सोचते हैं,कौन लाए नव बिहान ।
जान लो अब सत्य को ही,देख गीता या कुरान ।।
रज रज बनैं अब...
माॅं
सिर्फ तुम
देशप्रेम-पंचच...
लक्ष्मीबाई
मॉं काली स्तु...
देशप्रेम -पंच...
देश की लेखनी....
दुनिया का सबस...
मनमोहन की बजत...
जो बुंती ही रही बिना रुके ये जाल सारी उम्मीद टिकी है तुझ पर जो बुंती ही रही बिना रुके ये जाल सारी उम्मीद टिकी है तुझ पर
शौम्य विनम्र शालीन मानव मूल्य विकास बैभव का शिल्पीकर शिल्पी अमोलक।। शौम्य विनम्र शालीन मानव मूल्य विकास बैभव का शिल्पीकर शिल्पी अमोलक।।
बेटे ने जवाब दिया "आपके द्वारा ही दस वर्ष पहले लगाये गये आम हम सब खा रहे हैं।" बेटे ने जवाब दिया "आपके द्वारा ही दस वर्ष पहले लगाये गये आम हम सब खा रहे हैं।"
होने वाली है पल में अब मेरी विदाई, नए साल की बधाई होने वाली है पल में अब मेरी विदाई, नए साल की बधाई
मगर कामयाबी के सारे मकाम तुम से हाथ ज़रूर मिलाएंगे। मगर कामयाबी के सारे मकाम तुम से हाथ ज़रूर मिलाएंगे।
आज नहीं हुआ तो कल का इंतजार कर तैयारी थोड़ा बेहतर कर. आज नहीं हुआ तो कल का इंतजार कर तैयारी थोड़ा बेहतर कर.
मेरे भी जज्बात हैं, मेरे भी कुछ ख़्वाब हैं, मुंह मे जुबान रखती। मेरे भी जज्बात हैं, मेरे भी कुछ ख़्वाब हैं, मुंह मे जुबान रखती।
ढेर सारे सपनों के साथ नई उम्मीदों के संग नए रंगों के पंखों के संग ढेर सारे सपनों के साथ नई उम्मीदों के संग नए रंगों के पंखों के संग
मैं कवि हूँ ,मेरा काम है लिख कर कहना ! दर्द अपना हो या दूसरे का सबको बयां करना । मैं कवि हूँ ,मेरा काम है लिख कर कहना ! दर्द अपना हो या दूसरे का सबको बयां करन...
कर्मपथ पर चल पड़ा हूँ देखते हैं क्या मिले। कर्मपथ पर चल पड़ा हूँ देखते हैं क्या मिले।
मैं तुम्हारे अंदर छुपा हुआ जुनून हूं मैं तुम्हारे अंदर चमकता हुआ नूर हूं मैं तुम्हारे अंदर छुपा हुआ जुनून हूं मैं तुम्हारे अंदर चमकता हुआ नूर हूं
मौसमी फसलों के प्रयोग को बढ़ाने को जल योद्धा बनना है, मौसमी फसलों के प्रयोग को बढ़ाने को जल योद्धा बनना है,
यूं चुप चुप भी रहे मगर चांदनी से मुंह छुपाये यूं चुप चुप भी रहे मगर चांदनी से मुंह छुपाये
तेरा मंजिल है तू अपने आप को पहचान ले खुद को खुद से गले लगा ले सत्य धर्म कर्म को अपना तेरा मंजिल है तू अपने आप को पहचान ले खुद को खुद से गले लगा ले सत्य धर्म कर्म...
मान,अपमान की परवाह न उसको, शत्रु-मित्र को सम समझता।। मान,अपमान की परवाह न उसको, शत्रु-मित्र को सम समझता।।
जीवन दर्द है हमारा, जो मिटता नहीं कभी यारा। जीवन दर्द है हमारा, जो मिटता नहीं कभी यारा।
गर्मी, सर्दी, धूप, बारिश हर मौसम मे इनकी मेहनत होती। गर्मी, सर्दी, धूप, बारिश हर मौसम मे इनकी मेहनत होती।
जोर से हँस देती हूँ तभी तो खुशनुमा है ये मेरी छोटी सी जिंदगी जोर से हँस देती हूँ तभी तो खुशनुमा है ये मेरी छोटी सी जिंदगी
कागज,कलम, स्याही में ही पाती हूं तो कवि बन जाता है।। कागज,कलम, स्याही में ही पाती हूं तो कवि बन जाता है।।
सपने की कोई उम्र नहीं होती, हर सपना हकीकत में बदल सकता है। सपने की कोई उम्र नहीं होती, हर सपना हकीकत में बदल सकता है।