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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Inspirational

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Inspirational

शरदोत्सव

शरदोत्सव

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मधुर सुहानी रात बनी है, शरद पूनम है आज,

श्याम सुंदर ने मुरली बजाई, छेड़ा है केदार राग,


ताकधीनाधीन ताकधीनाधीन ताकधीनाधीन

धाधा तिरकीट धाधा, धाधा तिरकीट धाधा।


दौड़ी दौड़ी गोपियां आई, सज के सोलह सिंगार,

दौड़ी आई राधा रानी, यमुना तीरे आज।

छूम छननन पायल बाजे, तालीयों का हुआ नाद,

श्याम सुंदर ने मुरली बजाई, छेड़ा है केदार राग।


ताकधीनाधीन ताकधीनाधीन ताकधीनाधीन, 

धाधा तिरकीट धाधा, धाधा तिरकीट धाधा। 


धरती नाचे, अंबर गाजे, शोर मचा है आज,

ता थै त् त् थै, ता थै त् त् थै, नृत्य करे सब साथ।

झांझ बाजे, पखांवज बाजे, अद्भुत जमा है रास,

श्याम सुंदर ने, "मुरली" बजाई, छेड़ा है केदार राग।


ताकधीनाधीन ताकधीनाधीन ताकधीनाधीन

धाधा तिरकीट धाधा, धाधा तिरकीट धाधा।.....



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