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Kahkashan

Abstract

2.8  

Kahkashan

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श्रद्धांजलि

श्रद्धांजलि

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नमी रह गई आँखों में बस,

दर्द नही अब होगा कम।


कर्ज़ चुका पाऐ वर्दी का,

नही किसी में इतना दम।


एक बड़ी आफ़त कोरोना,

और शहीदों का भी ग़म।


मुश्किल दौर बड़ा है आया,

चलो दुआएं मांगे हम।


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