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भारती दिव्यांशी

Romance

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भारती दिव्यांशी

Romance

सहरा लगा

सहरा लगा

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ये कभी दरिया कभी सहरा लगा

क्या बताएं इश्क़ ये क्या-क्या लगा।


क्या अदाएं ,नाज़ भी, अन्दाज़ भी,

ख़ूब-रू उसका ही बस चेहरा लगा।


ख़ुद से ख़ुद ही रूबरू जब हम हुए,

आइना उस रोज आइना लगा।


मुद्दतों से कब किसी से वास्ता,

मुद्दतों से कब कोई अपना लगा।


सुन रहा है बात मेरी यार ये,

आज तो दिल भी मुझे अच्छा लगा।


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