शोषण व शोषित
शोषण व शोषित
शोषण शोषित से अलग , दुनिया एक बनाएंगे ।
और हृदय विश्वास देकर , प्रेम पुरित कर जाएंगे ।
तन में मेरे जब तक प्राण हैं अभिमान भाव रहेंगे।
नेह का प्रतिदान पाकर , हृदय पुलकित कर पाएंगे।
भाग्य से कब तक लड़ोगे , कर्म पर भरोसा रख ।
जीवन की तमन्ना है तो अपने धर्म पर भरोसा रख ।
सनातन ही परम धर्म है , और सनातन ही रहेगा।
शोषण से सर्वदा दूर रहना , पोषण पर भरोसा रख ।।
