शिव की भक्ती
शिव की भक्ती
ललाट पर है भस्म लगाए,
आरम्भ जिसका शमशान है,
माथे पर है चंद्र सोहे जटावो में
गंगा विराजमान है !
आदि भी यही,अंत भी यही है
इनमें ही समाया संसार,
मेरे भोले नाथ का ना जाने
मुझ पर कितना एहसान है !
