शीर्षक: बात बापू की
शीर्षक: बात बापू की
बात चली तो याद आई बापू की…
बात चली तो याद आया कद आज बापू महात्मा का
कद को आज भी छू न पाया इतना कद हैं बापू का
गरीबी देख धोती आधी की थी तभी सम्मान बापू का
ठाठ छोड़ लोगों के बीच रहे यही पहचान बापू की।
बात चली तो याद आई बापू की…
एक लाठी ही तो हथियार पहचान बापू की
अहिंसा से गोरों को भगाया यही पहचान बापू की
शौचालय स्वयं साफ करो यही सीख थी बापू की
बा को साथ ले देश उत्थान में लगे ये यात्रा बापू की
बात चली तो याद आई बापू की…
घर घर चरखा पहुंचाया यही थी बात बापू की
अंग्रेजों को भगाया अहिंसा से यही पहचान बापू की
सीधी साधी कार्यशैली ही पहचान बापू की
आप सा कोई हुआ नहीं बस कुछ बात न्यारी बापू की
बात चली तो याद आई बापू की…
निजता खत्म कर सभी के हुए तभी उपाधि बापू की
सत्य राह पर चलना यही प्रेरणा थी बापू की
आज की सभी के दिल में बसी छवि बापू की
आज भी कोई मिसाल नहीं हमारे बापू की
बात चली तो याद आई बापू की…
अपनो ने ही घात लगा कर दी थी हत्या बापू की
हुई फांसी की सजा जिसने हत्या की थी बापू की
आप हमेशा दिलो में राज करोगे बापू जी
आप हमेशा अमर रहोगे बापू जी।
