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Amita Dash

Abstract

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Amita Dash

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शब्दों के मोती(खिलौना नहीं)

शब्दों के मोती(खिलौना नहीं)

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लड़का हो या लड़की 

मिट्टी का खिलौना नहीं

गुड्डू हो या गुड्डी

कोई फर्क नहीं,है तो खून मेरा

परवरिश मेरी, नीचे गिरना नहीं।

टूटकर बिखरना नहीं

दूल्हा,दुल्हन की बाजार में 

मुझे बेचना नहीं।

मेरी कला का प्रदर्शन करना नहीं।

कीमत लगाना नहीं

आंधी आए, तूफान आए

डटकर मुकाबला करना।

भागना नहीं।

समाज में प्रतिष्ठित होना सही

मोती बनना, कांच नहीं

गुड्डा हो या गुड्डी, भेदभाव मन में मुझे लाना नहीं

खुद पालूंगी,किसके भरोसे छोडूंगी नहीं।



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