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Praveen Gola

Inspirational

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Praveen Gola

Inspirational

शब्द कचरा नहीं होते

शब्द कचरा नहीं होते

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किसी ने शब्दों को ,कचरे का निवाला बना डाला ,

अरे ये शब्द ही हैं ज़िन्होने ,उसे अब तक है पाला।

शब्द कचरा नहीं होते ,ये एक भाव बनते प्यारे ,

कोई लेखक कैसे भला इनको ,कचरा बना परोसेगा प्यारे ?

ये कहना बिल्कुल गलत है ,कि अपने दिमाग का कचरा ,

लेखक ने शब्दों के सहारे ,किसी कागज़ पे दे पसरा।

ज़रा पूछे वो अपने दिल से ,क्या वो खुद कचरा फैलाता है ?

अगर नहीं तो फिर क्यूँ ,औरों को ऐसे जलाता है.

लेखक की लेखनी लिखती है वही ,जिसमे कई भाव होते हैं ,

ऐसे लेखों का क्या उपयोग ,जिनमे कई दाग होते हैं.

इसलिये कुछ भी लिखने से पहले ,थोड़ा सोच कर लिखें ,

हजारों लेखकों की भावनायों को ,ऐसे कभी ना कुचलें।।



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