सफ़र
सफ़र
है सुनसान डगर।
है अकेला सफ़र।
न है कोई साथी,
न ही हमसफ़र।
हर सिम्त वीरानी,
जाए जहा भी नज़र।
बंजर ज़मीन तो,
है सूखे रहे शजर।
मिले कोई अपना,
ढूंढ रही हर नज़र।
क्या होगा अंजाम,
है ये किसे ख़बर।
है सुनसान डगर।
है अकेला सफ़र।
न है कोई साथी,
न ही हमसफ़र।
हर सिम्त वीरानी,
जाए जहा भी नज़र।
बंजर ज़मीन तो,
है सूखे रहे शजर।
मिले कोई अपना,
ढूंढ रही हर नज़र।
क्या होगा अंजाम,
है ये किसे ख़बर।