STORYMIRROR

Sneha Swadha

Abstract

3  

Sneha Swadha

Abstract

सावन

सावन

1 min
23

देखो रे सखी सावन आया

मेरे तेरे सब के दिल को भाया

संग अपने हरे रंग की सौगात लाया

साज, सिंगार और बागो मे झूले


मन इतराए दिल झूमे हौले हौले

भोले को रिझाऊ संग मईया पार्वती को मनाऊँ


कर के वंदना दोनों की

सावन के इस महापर्व मनाऊँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract