रोटी की तलाश
रोटी की तलाश
रोटी की तलाश में
फिरता हर इंसान है
कोई कलम साथ लिए
तो कोई हाथ लिए कुदाल है
जो न हो इसकी चाह तो
निकम्मा हो जाये हर इंसा यहाँ
नीरस बनेगी ज़िन्दगी
पहाड़ बन कटेगी न ये ज़िन्दगी
चाह में इसके कभी भी तुम
न राह गलत चुनना कभी
मेहनत की रोटी की महक
तृप्त कर सुलाती चैन की है नींद
ले आस और विश्वास संग
चल पड़ो नये सफर की ओर
पूरी कभी मिले
तो कभी आधे में
ज़िन्दगी यूँ ही कट जायेगी।
