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Rajani Ranjan

Abstract

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Rajani Ranjan

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रंग डारो न श्याम

रंग डारो न श्याम

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रंग डारो न डारो न डारो न डारो श्याम,

विनती करूँ मै करजोर।

भींगी चुनरिया तो घर कैसे जाऊंगी,

ऐसे करो न चितचोर।।


टेसू के पुष्प खिले, महुआ के गंध मिले

सरसो के पीत रंग, अद्भुत बसंत मिले।

मन रागी हुआ है चकोर, विनती करूँ मैं करजोर।


रंग भरे अँखियों में, चर्चा है सखियों में

बात कोई भी बोले, तुम ही हो बतियों में

नाम तेरा करता विभोर,विनती करूँ मैं करजोर।


कोयल की कूक सुनो ,पपीहा की हूक सुनो,

मदमाता अल्हड़ सा, बहका बसंत सुनो,

प्रेम दग्ध है मन का मोर, विनती करूँ मैं करजोर।



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