रंग बदलती दुनिया
रंग बदलती दुनिया
रंग बदलती ईस दुनिया देखकर,
ईन्सान भी रंग बदलता रहता है,
शतरंज की खतरनाक चाल चलकर,
ईन्सानियत भी वह भूल जाता है।
मोह माया में गहरी डूबकी लगाकर,
वह वैभव और विलासी बन जाता है,
तन और मन की पवित्रता भूलकर,
ईन्सान हमेशा हैवान बन जाता है।
दिन रात वह अभिमान में रह कर,
अपनी निर्मलता भी भूल जाता है,
खूदा सामने मिले तो मुंह मोडकर,
सर झूकाना भी वह भूल जाता है।
खूदा भी ईन्सान का तमाशा देखकर,
उसे पायमाली की थप्पड लगाता है,
उसके कर्मो का हिसाब देखकर "मुरली",
उसको नर्क का अधिकारी बनाता है।
