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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Inspirational

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Inspirational

मै और मेरा संंगीत

मै और मेरा संंगीत

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संगीत के सात स्वर समझकर,
मै मधुर बंदिशे बनाता हूंँ,
राग और रस का समन्वय कर के,
मेरे दिल के भावों को बहाता हूंँ।

संगीत साधना में मग्न बनकर,
मै स्वरों का महत्व समझता हूंँ,
स्वरों के सरगम की माला बनाकर,
मेरी बंदिश को मै सज़ाता हूंँ।

संगीत के मधुर राग गा कर,
मै नाद बृम्ह को मै जगाता हूंँ,
सूरीली बंदिशे साझ में बजाकर,
मै वातावरण को महकाता हूंँ।

"मुरली" की मधुर तान छेड़कर,
मैं इष्ट देवताओं को रिझाता हूंँ,
संगीत सागर में डुबकर "मुरली",
मै जीवन संगीतमय बनाता हूंँ।

 रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)


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