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रिपुदमन झा "पिनाकी"

Abstract

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रिपुदमन झा "पिनाकी"

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राफाल

राफाल

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शौर्य बढ़ाने आ गया, भारत में राफाल।

दुश्मन थर-थर कर रहा, देखो आया काल।।


आसमान को चीरता, गर्जन करता यान।

उतरा भारत भूमि पर, ये राफाल विमान।।


उड़ता है जब वेग से, भर कर यह हूंकार।

रिपुदल भय से ग्रस्त हो, करता हाहाकार।।


निपुण युद्ध में है बहुत, घातक यह हथियार।

दुश्मन चित हो जाएगा, सह न सकेगा वार।।


सुविधाएं अति आधुनिक, उत्तम है तकनीक।

शौर्य पराक्रम का बना, है राफाल प्रतीक।।


भारत की सेना हुई, शक्ति अस्त्र से युक्त।

विजय सुनिश्चित ही हुई, हो जाओ भयमुक्त।।


गर्जन सुन राफाल की, शत्रु हुआ आक्रांत।

कर दे ना संहार सब, संहारक दुर्दांत।।


अब तो बच न पाएगा, पाकिस्तान या चीन।

डर बन कर मन में हुआ, अब रफाल आसीन।।



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