STORYMIRROR

Asha Pandey 'Taslim'

Abstract

3  

Asha Pandey 'Taslim'

Abstract

राख

राख

1 min
188

मौसमी जीभ

जब-जब फड़फडा़ये

चेहरे की उस ऐंठ को देखकर

तृप्त हो जाती हूँ मैं


मुझे पता है

नारियल का सौन्दर्य क्या है

गुण क्या है

लाभ क्या है


उपरी खोल को दे दिया है

उन राख वाले हाथों को

ताकि मांजते रहने में ही

पूरा जीवन बीत जाए


नारियल के अंदर की बातें

कभी समझ न आए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Asha Pandey 'Taslim'

Similar hindi poem from Abstract