STORYMIRROR

Deepali Mathane

Abstract

3  

Deepali Mathane

Abstract

प्यास

प्यास

1 min
357

सारा जग तेरे प्रेम का प्यासा 

तेरी प्यास बुझाऊँ कैसें

महकती प्रेम की बगीया को 

मोहन और मैं महकाऊँ कैसे

प्रेम की अविरत धारा को मेरे 

प्रेम से बोलो रिझाऊँ कैसें

जग की प्यास बुझानेवाले 

तुझे प्रेम रस पिलाकर बहकाऊँ कैसे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract