Sandeep Sharma
Action
धरती नहीं देंगे मरने
सजायेेंगे सवारेेंगे
पेड़ों से सजा देंगे।
वयं रक्षाम् व...
दीप
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तानाशाही
ताकत
सरस्वती मंदिर
पर्यटन
प्रेम
आतंकी का खौफ बताओं, कब तक राज करेगा अब घाव लगे हैं जो हृदय पर, उनको कौन भरेगा अब बतलाओ क्या उत्तर ... आतंकी का खौफ बताओं, कब तक राज करेगा अब घाव लगे हैं जो हृदय पर, उनको कौन भरेगा अ...
अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत
व्याधियां प्रदत्त सूक्ष्म जीवों से, मानव पर तो हैं ढा रहीं प्रलय। व्याधियां प्रदत्त सूक्ष्म जीवों से, मानव पर तो हैं ढा रहीं प्रलय।
यह कश्मीर तो ना देंगे हम वह कश्मीर भी ले लेंगे इस धरती मैया की खातिर जान भी अपनी दे दे यह कश्मीर तो ना देंगे हम वह कश्मीर भी ले लेंगे इस धरती मैया की खातिर जान भी अ...
ये ढूंढ रहे किसको जग में शामिल तो हूँ तेरे रग में, तेरा ही तो चेतन मन हूँ क्यों ढूंढे ये ढूंढ रहे किसको जग में शामिल तो हूँ तेरे रग में, तेरा ही तो चेतन मन हूँ क्य...
मर्यादा मर रही प्रतिदिन अत्याचार, अन्याय, भय, भ्रष्टाचार पर्याय युवा बन रहा है मर्यादा मर रही प्रतिदिन अत्याचार, अन्याय, भय, भ्रष्टाचार पर्याय युवा बन रह...
ख़ामोशी भी दिले यार का दिया तोहफ़ा होती है। सजा जैसी ज़िंदगी लगती है गर बात ना होती है ख़ामोशी भी दिले यार का दिया तोहफ़ा होती है। सजा जैसी ज़िंदगी लगती है गर बात न...
क्योंकि स्त्री की तरह इस शिकार के साथ जीना इतना आसान नहीं। क्योंकि स्त्री की तरह इस शिकार के साथ जीना इतना आसान नहीं।
मुझे संघर्ष एवं संभावनाओं की असीमितता पर मुझे संघर्ष एवं संभावनाओं की असीमितता पर
सब को आँचल की छाया में बिठाकर, खुद सहती है धूप सब को आँचल की छाया में बिठाकर, खुद सहती है धूप
कुछ नीति नियम के साथ भरपूर मस्ती के साथ। कुछ नीति नियम के साथ भरपूर मस्ती के साथ।
छापली थी, मुगल छावनी, दिवेर से, जीत की शुरुआत हुई । घोड़े समेत , बहलोल खाँ को चीरा, वीर प्रताप की ... छापली थी, मुगल छावनी, दिवेर से, जीत की शुरुआत हुई । घोड़े समेत , बहलोल खाँ को च...
सरहद चाहे देशों के बीच हो या दिलों के बीच, इंसान की ही बनाई हुई होती हैं। सरहदों का मतलब और मकसद ही ... सरहद चाहे देशों के बीच हो या दिलों के बीच, इंसान की ही बनाई हुई होती हैं। सरहदों...
सब मिलकर भरते रहे उसमें पूरा जोश उसको अपने कर्म का किंतु तनिक रहा न होश सब मिलकर भरते रहे उसमें पूरा जोश उसको अपने कर्म का किंतु तनिक रहा न होश
कौन कहता है कि गुलशन की जमीं उर्वर नहीं, कौन कहता है कि मेरा ये वतन कमजोर है। कौन कहता है कि गुलशन की जमीं उर्वर नहीं, कौन कहता है कि मेरा ये वतन कमजोर है।
बिना अनुमति कुछ भी नहीं करते फिर भी पाबंदियाँ, कानून का डर हमें ही है बिना अनुमति कुछ भी नहीं करते फिर भी पाबंदियाँ, कानून का डर हमें ही है
विनम्रता आभूषण धीर वीर गंभीर नैतिक मूल्यों का मानव मानवता का पराक्रम अग्रदूत टकराव नही विनम्रता आभूषण धीर वीर गंभीर नैतिक मूल्यों का मानव मानवता का पराक्रम अग्रदूत ...
संविधान में केवल अधिकारों की मांग नहीं लिखी, राष्ट्र अखंडता और एकता के भी लेख दिए होंगे संविधान में केवल अधिकारों की मांग नहीं लिखी, राष्ट्र अखंडता और एकता के भी लेख द...
हम सब कविता के एक एक शब्द को आत्मसात कर रहे थे आनंद ले रहे थे। हम सब कविता के एक एक शब्द को आत्मसात कर रहे थे आनंद ले रहे थे।
हर बात का समाधान समाज की रूढ़िवादी सोच के आगे चुप रह जाना नहीं होता हर बात का समाधान समाज की रूढ़िवादी सोच के आगे चुप रह जाना नहीं होता