Sandeep Sharma
Action
धरती नहीं देंगे मरने
सजायेेंगे सवारेेंगे
पेड़ों से सजा देंगे।
वयं रक्षाम् व...
दीप
सपने
बुजुर्ग
परिश्रम
तानाशाही
ताकत
सरस्वती मंदिर
पर्यटन
प्रेम
अंकुर फूटता तब ज्ञान प्रकाश का निर्माण ब्रह्माण्ड का होता देख।। अंकुर फूटता तब ज्ञान प्रकाश का निर्माण ब्रह्माण्ड का होता देख।।
जब पराधीनता स्वीकार नहीं महावीरों ने कसम खायी, जब पराधीनता स्वीकार नहीं महावीरों ने कसम खायी,
जो भी तपता इस भट्टी में, ताप कर वो कुन्दन बन जाता जो भी तपता इस भट्टी में, ताप कर वो कुन्दन बन जाता
भारत देश को महान बनाना सदा हमें, भारत देश का नाम रोशन करना हमें। भारत देश को महान बनाना सदा हमें, भारत देश का नाम रोशन करना हमें।
लेकिन थे कुछ देश प्रेमी जिन्होंने देश को आजाद कराने का विचार किया। लेकिन थे कुछ देश प्रेमी जिन्होंने देश को आजाद कराने का विचार किया।
देशभक्ति का भाव मन के भीतर भरो उनकी कुर्बानियों को अब याद तुम करो। देशभक्ति का भाव मन के भीतर भरो उनकी कुर्बानियों को अब याद तुम करो।
जो आतताइयों के अत्याचार के आगे कभी ना झुकने पाते थे। जो आतताइयों के अत्याचार के आगे कभी ना झुकने पाते थे।
देश भक्ति सीखना है तो उनसे सीखों जो मर मिटे थे देश के लिए। देश भक्ति सीखना है तो उनसे सीखों जो मर मिटे थे देश के लिए।
मृत्यु का आना निश्चित है तुम उसे रोक ना पाओगे। मृत्यु का आना निश्चित है तुम उसे रोक ना पाओगे।
आज भले हर गाँव गली में आजादी का मेला है। इस आज़ादी को पाने में कितनों ने दुःख झेला है। आज भले हर गाँव गली में आजादी का मेला है। इस आज़ादी को पाने में कितनों ने दुःख...
कहीं सुदूर में रहने वाले आदिवासियों को तो समुद्र ने नहीं लील लिया। कहीं सुदूर में रहने वाले आदिवासियों को तो समुद्र ने नहीं लील लिया।
चाहे ये नन्हे हो या मझले हो या हो फिर वो बड़े भैया, बड़े चाव से बहनों से राखी तुम सभी चाहे ये नन्हे हो या मझले हो या हो फिर वो बड़े भैया, बड़े चाव से बहनों से राखी...
पांडव क्या कौरव से युद्ध में हार गया था शकुनि के प्रपंचों से कोई निराश हुआ था ? पांडव क्या कौरव से युद्ध में हार गया था शकुनि के प्रपंचों से कोई निराश ...
रात की बासी रोटी भी अचार के साथ आज के ताजे खाने से भी अच्छी लगती थी। रात की बासी रोटी भी अचार के साथ आज के ताजे खाने से भी अच्छी लगती थी।
आओ, हम सब अपनी अमृत यात्रा का श्रीगणेश करें. आओ, हम सब अपनी अमृत यात्रा का श्रीगणेश करें.
चाहे सफ़र करते वक़्त आप बैठे हुए या खड़े हुए, चाहे सफ़र करते वक़्त आप बैठे हुए या खड़े हुए,
न परिवार की चिंता न किसी प्रकार का तुमको भय, न परिवार की चिंता न किसी प्रकार का तुमको भय,
मेरी ना तो किसी की भी ना सोच एसिड फेंका, इतना पागल होकर ही उसने घृणात्मक कृत्य किया। मेरी ना तो किसी की भी ना सोच एसिड फेंका, इतना पागल होकर ही उसने घृणात्मक कृत...
तोड़ देगा ओ गरूर मेरा मुझे क्या पता था । जिस जहर को पानी की तरह पीता रहा। तोड़ देगा ओ गरूर मेरा मुझे क्या पता था । जिस जहर को पानी की तरह पीता रहा।
मुझे अपना फर्ज निभाना है लाया हूं पैगाम एकता का मुझे अपना फर्ज निभाना है लाया हूं पैगाम एकता का