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Power Ranger

Abstract


5.0  

Power Ranger

Abstract


पुरानी यादों का पिटारा

पुरानी यादों का पिटारा

2 mins 328 2 mins 328

मैंने देखा हैं

उन कोटा की गलियों में

मुर्दों को भी चलते , मैंने देखा है।


हजार सपने लेकर, उन्हे पुरा करने के लिये 

तपती धूप में उन्हे दोड़ते , मैंने देखा है ।


अच्छी पड़ाइ पाने के लिये कभी कोटा तो कभी इन्दौर, 

सैकड़ों कोचिंगो में भटकते , मैंने देखा है।


जो परिन्दे उड़ के आये थे दूर अपने घरों से 

उन्हे खूद पिंजरे की तरफ़ भागते , मैंने देखा है।


Allen , BMC, से AAYAM तक, रास्तों में  

हरी , लाल तो कभी नीली t-shirt में ं Robot's को 

भरी धूप में पिघलते , मैंने देखा है।


घरवालों के सपने पूरे करने के लियें , खूद के 

सपनों को अपने ही अन्दर दफ़न होते , मैंने देखा है।


अपनी असली प्रतिभा पर चादर डालें , कठपुतली 

का खेल अच्छे से खेलते , मैंने देखा है।


जीवन में लाख परेशानियां , पर चेहरे

पे उस झूठी हँसी को लाकर मुस्कुराना , मैंने देखा है।


फ़िजिक्स के सवालों में उलझकर उस बेबसी को

आखों के कोने से पानी बनकर निकलते , मैंने देखा है।


किताबों के मुर्दा घरो (पुस्तकालय ) में

H C Verma को सिना तान टहलते , मैंने देखा है।


स्कूल वाली प्यार कि किताब को भूलकर 

NCERT से दिल लगाते , मैंने देखा है।


सख्ती से पड़ाई करने आये थे पर लड़की के

Doubt पूछने पर झट से पिघलते , मैंने देखा है।


कई सपनों को पुरा होते , तो कई ख्वाबों को 

सूली पर लटकते , मैंने देखा है।


पिता को हमारे भविष्य कि चिंता रहतीं पर 

माँ को हमें शा हि प्यार करते , मैंने देखा है।


बड़े घरों में रहने वालों को आज आसमान के 

नीचे 10/10 के कमरों में समें टते , मैंने देखा है।


हजार दिक्कतें रहने - खाने में पर मम्मी को

फोन पे "सब बड़ीया हे" , कहते में ने देखा है।


बहुत को अवसाद में सिग्रेट कि डिब्बियों

के साथ जलते, तो कईयों को शराब में डूबते , मैंने देखा है।


डाक्टर बनने के सपने को खूद 

अपने पैरों तले कुचलते , मैंने देखा है! 


अपने सपनों को खाक होते देख 

कईयों को घर वापस जाते , मैंने देखा है।


जिन्दगी ये हताश कईयो को

पंखे से लटकते , मैंने देखा है।


AIIMS का सपना देखकर,  

fishery पर थमते , मैंने देखा है।


हजार नाकामियां मिली हो, पर लाख अनुभव 

के साथ ज़िन्दगी को मज़े से जीते , मैंने देखा है।


आज उसी सपनों के शहर इंदौर में

फिर एक बाप को अपने अरमानों के साथ 

अपने बच्चे को बोरिया - बिस्तर के साथ

छोड़ते , मैंने देखा है।


आज मैंने ये मेंकवर री नाकामी पर लिखा है।

पर जरूरी नहीं कि डॉक्टर  बनेंगे तभी 

हम जिन्दा रह पायेंगे , कईयो को डॉक्टर  

बनने के बाद भी घूट-घूट के मरते , मैंने देखा है।



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