पुण्य कर्त्तव्य हमारा
पुण्य कर्त्तव्य हमारा
धरती मां करती है भरण-पोषण हमारा,
उसके संतुलन से सुरक्षित जीवन हमारा।
इस संसार में हर चीज की होती है सीमा,
परिवर्तन है निश्चित चाहे हो तेज या धीमा।
दुख धरा लाख सहती और दुख हरती हमारा,
धरती मां करती है भरण-पोषण हमारा,
उसके संतुलन से सुरक्षित जीवन हमारा।
गुरु जन सदा ही हम सबको देते हैं शिक्षा,
करें प्रकृति पूजन करें प्राण प्रण से सुरक्षा।
जब तक झूमेगी धरती सुरक्षित जीवन हमारा,
धरती मां करती है भरण-पोषण हमारा,
उसके संतुलन से सुरक्षित जीवन हमारा।
धन और दौलत सीधे न पेड़ों पर आती,
अन्न-फल-फूल देकर है समृद्ध बनाती।
धरा की सुरक्षा का पुण्य कर्त्तव्य हमारा।
धरती मां करती है भरण-पोषण हमारा,
उसके संतुलन से सुरक्षित जीवन हमारा।
