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Renu Arya

Tragedy

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Renu Arya

Tragedy

पर्यावरण

पर्यावरण

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है विकास या पतन,

अब जल भी न मिले बिना धन।

दूषित हो गया पूरा पर्यावरण,

और बात हो रही है खोजने की गगन।

अपनी पॄथ्वी नहीं है सुरक्षित,

हमने प्रगति के नाम पर इसे किया दूषित ।

अपनी ज़रूरत या सुविधा के नाम पर हमने,

कचरे का अंबार जमा किया सबने ।

अब डर रहा है मानव जाएँ कहाँ, रहे कहाँ,

सारा संसार खुद ही जलाकर भर दिया धुआँ-धुआँ ।

जागो मानव जागो,

अपनी गलतियों से मत भागो ।

जब विकास के नाम पर पतन हुआ हमसे,

तो मिलकर अपनी बुद्धि से दूर करेंगे इसे ।

इसी पॄथ्वी पर बनाएँगे प्रगति की ऐसी सीढ़ी ,

नाज़ करेगी हमारी आने वाली पीढी़ ।



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