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Rajshree Vaishampayan

Abstract

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Rajshree Vaishampayan

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पृथ्वी को समझो

पृथ्वी को समझो

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पृथ्वी को समझो अपने माँ के समान

इसी से तो हैं हमारी जिंदगी -ए- जान।


बिन मांगे कितना कुछ देती हैं वो प्यार से

फ़र्ज़ बनता हैं हमरा कदर करे और संभाले


अपनी पृथ्वी माँ को दिलों जान से।


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