परंपराएँ
परंपराएँ
कहने के लिए तो केवल एक शब्द हे
लेकिन सब कुछ समा जाता हे
इस एक शब्द में
अच्छा हे या बुरा , किसी को पता नहीं
लेकिन सालो से चले आ रहा हे
ये एक शब्द
सालो पहले कोई कुछ कह गया
वो बोले बुरे तो बुरा , अच्छा तो अच्छा
लेकिन किसी को पता नहीं की क्या यह हे सच्चा
मुझसे पूछो तो सवाल मानने या न मानने का नहीं
श्रद्धा या अंतश्रद्धा का नहीं
अच्छे या बुरे का नहीं
सवाल हे सही और गलत का
ज्यादा कुछ फर्क नहीं हे इन दोनों में
बस एक कदम लगता हे
सही से गलत जाने में, और
गलत से सही वापस आ जाने में
जरा सोचो, में तो कहती हो की
सोचने से पहले एक और बार सोचो
इस एक शब्द के बारे में
फिर समझेगा की क्या - क्या समां जाता हे इस एक शब्द में
