राहुल द्विवेदी 'स्मित'
Abstract Romance
बेचैनी की व्याख्या, उलझन के अनुवाद ।
रात दिवस करता फिरे, हृदय तुम्हारे बाद ।।
बूँद-बूँद आँसू चखे, घूँट-घूँट फरियाद ।
तब जाकर हम जी सके, प्रिये तुम्हारे बाद ।।
बदल गये हैं ख...
अगर चाहते हो ...
गीतिका छंद छं...
नेत्र यदि आपक...
आस लगाए बैठी ...
आदमी की अक्ल ...
एक मौसम शायरा...
एक ऐसा भी जमा...
दौर सतयुग का ...
साँसों का बुन...
मतलब के सब यार, दग़ाबाज़ हमारे यार, सबसे अच्छा लगता, सदा अपना घर यार। मतलब के सब यार, दग़ाबाज़ हमारे यार, सबसे अच्छा लगता, सदा अपना घर यार।
मायूसी को मुस्कान बनाकर माँ बाप की दुआओं को ढाल बनाकर मायूसी को मुस्कान बनाकर माँ बाप की दुआओं को ढाल बनाकर
होली का रंग चढ़ा ऐसा यादों का गुलाल उड़ने लगा। होली का रंग चढ़ा ऐसा यादों का गुलाल उड़ने लगा।
विश्वास की हल्दी का पीला रंग अपने रिश्ते की देह पर मल देना। विश्वास की हल्दी का पीला रंग अपने रिश्ते की देह पर मल देना।
परीक्षाएं देते देते सीता सी तेरी गोद में सो जाती है बेटियां। परीक्षाएं देते देते सीता सी तेरी गोद में सो जाती है बेटियां।
तब तक हम बेपरवाह ही रहते हैं, हर समस्या का समाधान पिता में ही दिखते हैं। तब तक हम बेपरवाह ही रहते हैं, हर समस्या का समाधान पिता में ही दिखते हैं।
ज़िम्मेदारी में बोझिल हो गए थे, बैठना चाहते है, बच्चों के पास , ज़िम्मेदारी में बोझिल हो गए थे, बैठना चाहते है, बच्चों के पास ,
रात की चादर में लिपटे हुए न जाने कितने किस्से, किसी को करती है बर्बाद तो किसी को आसरा रात की चादर में लिपटे हुए न जाने कितने किस्से, किसी को करती है बर्बाद तो किसी...
नभ में गुंजान होता है, विजय महान होता है, वीरों की वीरता का भी, यहां सम्मान होता है। नभ में गुंजान होता है, विजय महान होता है, वीरों की वीरता का भी, यहां सम्मान ह...
यूं ही मुझमें बैठे बैठे गुम नहीं हो सकते शुक्र मनाओ मेरी तरह तुम नहीं हो सकते। यूं ही मुझमें बैठे बैठे गुम नहीं हो सकते शुक्र मनाओ मेरी तरह तुम नहीं हो सकते...
विधाता, जब पुरुष होता है- युद्ध करता है! विधाता, जब पुरुष होता है- युद्ध करता है!
हिरण्य कश्यप ने अत्याचार बढ़ाया बहन होलिका को वरदान मिला था हिरण्य कश्यप ने अत्याचार बढ़ाया बहन होलिका को वरदान मिला था
हर पीढ़ी है ख़ास- हर पीढ़ी ख़ूबसूरत सामान्यीकरण है अन्याय हर पीढ़ी के साथ ! हर पीढ़ी है ख़ास- हर पीढ़ी ख़ूबसूरत सामान्यीकरण है अन्याय हर पीढ़ी के साथ !
बूँद से - समुंद तक तुम- इतना फैले... कि सिमट नहीं पाए। बूँद से - समुंद तक तुम- इतना फैले... कि सिमट नहीं पाए।
किसी का घर सजाते ये तेरे खुरदरे हाथ। किसी का घर सजाते ये तेरे खुरदरे हाथ।
कल ये दौर भी हम पर आएगा आज जो करोगे वो कल तुम पर ही बरस जाएगा कल ये दौर भी हम पर आएगा आज जो करोगे वो कल तुम पर ही बरस जाएगा
हाँ, मेरी दुनिया, मेरी अच्छाई के बल चलती है। हाँ, मेरी दुनिया, मेरी अच्छाई के बल चलती है।
गाँठ में ग़रीबी है, गाँठ में अमीरी है, जीवन है, मृत्यु है मन की कामना है। गाँठ में ग़रीबी है, गाँठ में अमीरी है, जीवन है, मृत्यु है मन की कामना है...
लौकिक - अलौकिक में सबसे ऊपर जीवन का सार बस प्रेम ही तो है। लौकिक - अलौकिक में सबसे ऊपर जीवन का सार बस प्रेम ही तो है।
भस्म रंग लपेटे गले में गरल पिचकारी भस्म रंग लपेटे गले में गरल पिचकारी