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Phool Singh

Abstract

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Phool Singh

Abstract

परिवर्तन जरूरी है

परिवर्तन जरूरी है

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समुद्र की सतह से गहराई तक

हिचकोले लेती लहरें है

वक़्त संग बदलता जीवन 

कुछ रोज सीखा कर जाता है।।


तूफान कोई जब आ जाता तो

सब तहस-नहस कर जाता है

जिन्दगी का दस्तूर बता  

वक़्त का मोल बता कर जाता है।।


सोचता हूँ क्या फर्क होता

मूर्ख और मांझी में 

एक किनारे हमे ले जाता

दूसरा सागर में हमें डुबाता है।।


हँसी-खुसी से चलती जिन्दगी में 

कुछ अधूरापन रह जाता है 

रिश्तों में तो एक है हम सब 

पर व्यवहार गैरों सा होता है।।


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