STORYMIRROR

Dishika Tiwari

Children

3  

Dishika Tiwari

Children

परिवार

परिवार

1 min
252


है वह कौन जिसे हंसता देख सारे दुख मिट जाते हैं,

है वह कौन जिसे देखकर मुरझाए फूल खिल जाते हैं।


जिससे खुशी की शुरुआत होती है,

जिससे हर उदासी महक उठती है।


चाहे जैसा भी हो बेशक सदस्य हो चार,

जिसे प्यार से कहते हैं परिवार।


दादा दादी मम्मी पापा के साथ जो मजा आता है,

शायद ऐसा मजाक किसी को कहीं कहीं मिल पाता है।


दादा जी का पाठ पढ़ाना,

नई नई सीख सिखाना।


दादी की कहानियों को सुन के सोना,

ना सुने तो सारा घर है सुना।


मम्मी के हाथ का स्वादिष्ट खाना खाना,

मम्मी की एक आदत अच्छे संस्कार सिखाना।


हर कहीं तुम्हें खुशी मिल सकती है,

हर कहीं तुम्हारे मुंह पर मुस्कान आ सकती है।


परिवार जैसी खुशी कहीं नहीं मिल पाएगी,

परिवार जैसी मुस्कान कहीं नहीं खिल पाएगी।


परिवार का हाथ जब होता है साथ,

अपने आप बन जाती हैं हर बिगड़ी बात।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Children