"परिवार"
"परिवार"
नन्हे-नन्हे मोती जब मिलते, बन जाता है हार,
रिश्तों की डोरी से बंधकर, बनता है परिवार!
दिल से दिल की बंधती डोरी, दिल के जब खुलते है द्वार,
हर मुश्किल बनती आसान, जब साथ खड़ा परिवार!
घर-आँगन में हसीं ठिठोली, मुस्काती दिशाएँ चार,
उदर के संग आत्मा भी हो तृप्त, जब साथ खाये परिवार!
बट गई है आज दुनिया, मतलबी हुआ संसार,
एक दूजे के गम में आसूँ बहाये, साथ निभाता परिवार!
तस्वीरों की भाषा में ग़ुम, बातें बनी लाचार,
चेहरों से जो दर्द भाँप ले, वो प्यार है परिवार!
क्लब्स-डिस्को में पार्टीज, नहीं हमारे संस्कार,
माँ के बनाये हल्वे का केक, संग स्वाद ले परिवार!
आगे निकलने की होड़ में, साथ छोड़ते दोस्त-यार,
सपने हमारे करने को पूरे, हाथ बढ़ाता परिवार!
हैशटैग्स से रिश्ते बँधते, फ्रेंड लिस्ट की खूब भरमार,
लकीरों में जो बसा हुआ है, वो रिश्ता है परिवार!
रूठने मनाने का रोज़ का ड्रामा, पल में छिनतें अधिकार,
सुबह शाम लड़कर भी न टूटे, वो जोड़ है परिवार!
बदकिस्मत है बेचारा वो, है उसका बँटा धार,
मोल लगाए रिश्तों का, जो छोड़ रहा परिवार!
पल में बदलते रिश्ते लोग, प्यार बना व्यापार,
मोह-माया के बंधन से दूर, स्वर्ग है परिवार!
नोंक-झोंक व प्रेम का संगम, है खट्टा मीठा अचार,
संयुक्त हो या हो एकल, अनमोल है परिवार!
माँ की ममता, पापा का दुलार,
भाई-बहिन की तकरार से ही, पूरा होता परिवार!
सदियों का कोई सपना जैसे, हो जाता साकार,
किस्मत वाले है वो सभी, जिन्हे नसीब परिवार!
प्रेम,एकता,विश्वास का, अटूट बंधन अपार,
ज़िन्दगी के चित्र में रंगो सा, पक्का रंग परिवार!
शुक्रिया करुँ अदा मैं दिल से, प्रकट करूँ आभार,
भगवन मैं खुशकिस्मत हूँ, जो मिला ऐसा परिवार!
