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Monika Sharma "mann"

Romance

3  

Monika Sharma "mann"

Romance

प्रेम मेरा

प्रेम मेरा

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201

ऐसा निश्चल प्रेम है मेरा 

जो तुमसे मिलकर पूरा होता 

नदिया समंदर और यह हवा 

भी जिसकी उपमा देते 

ऐसा निश्चल प्रेम है मेरा 


त्याग आई जो दुनिया

दुनिया मैं तुम्हारी ख़ातिर

किया तुम ही को सर्वस्व

समर्पित 

तुम से शुरू शुरू और

तुम पर ही खत्म

ऐसा निश्चय प्रेम है मेरा 


तुम दीया और मैं तुम्हारी बाती

तुम तेल उसका, मैं तुम्हारी ज्योति

खुद को जला, जो अंधकार

दूर तुम्हारा करता

ऐसा निश्चल प्रेम है मेरा


तुम घर हो मैं उसकी नींव

तुम आस हो उसकी,

मैं आसरा तुम्हारा 

तुम प्राण उसके, मैं स्वास तुम्हारा 

तुम से निरंतर जीवन मेरा

ऐसा निश्चल प्रेम है मेरा


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