"प्रेम गली"साधुक्कडी हिंदी में स्वरचित मुक्तक
"प्रेम गली"साधुक्कडी हिंदी में स्वरचित मुक्तक
ज्ञान, ध्यान, तप आदि सब,
सहजहू कठिन बनाय,
प्रेम गली लागे भली,
मीरा, शबरी तक हरि लाय।
ज्ञान, ध्यान, तप आदि सब,
सहजहू कठिन बनाय,
प्रेम गली लागे भली,
मीरा, शबरी तक हरि लाय।