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ARVIND

Abstract

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ARVIND

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समय चक्र

समय चक्र

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समय–चक्र चलावे सब कूँ,

बिन ध्वनि,बिन गतिमान ।

कर्ता हम,भ्रम पालत राहि,

मूरख,अज्ञानी,अनजान ।


समय चक्र चलावे सबकू 

बिन ध्वनि,बिन गतिमान रे।।

हम "कर्ता" भरम पाले रहे,

जाने आंख खुले, अंजान रे ।


बड़ो विचित्तर खेला खेलें,

मिलि माया,समय,विधान रे।

जिनु यजमान समझु बैठे थे,

थे वे,पल दूई के मेहमान रे।


राजे रंक,पीर,सबुन ते,

रह्यो समय सदा बलवान रे। 

समय चक्र चलाए सबकूं,

बिन ध्वनि बिन गतिमान रै।


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