"कर्म और ज्ञान"
"कर्म और ज्ञान"
पाखी उड़े अकास में,
देहि भेद बतलाय
कर्म, ज्ञान के पंख द्वि,
साधु मुक्त कराए,
साधु मुक्त कराए,
सुख दुख एक समाना,
ये सब ज्ञानन को ज्ञान,
पीर,फकीरहु माना।
पाखी उड़े अकास में,
देहि भेद बतलाय
कर्म, ज्ञान के पंख द्वि,
साधु मुक्त कराए,
साधु मुक्त कराए,
सुख दुख एक समाना,
ये सब ज्ञानन को ज्ञान,
पीर,फकीरहु माना।