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J P Raghuwanshi

Inspirational

4  

J P Raghuwanshi

Inspirational

प्रातः दर्शन

प्रातः दर्शन

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जागो राम दृग खोलिये,

अरुणिमा चँहु ओर।

मंद-मंद, पवन वह रही,

सुहावनो हैं, भोर।


कोयलिया कूक रही, 

सरजू दें हिलोर।

वंदी जन करै गायन,

रहे कर जोर।


जागो राम राघव,

जागो चितचोर।

सावलों, सलोनो देह,

हर्षित मन मोर।


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