प्रार्थना
प्रार्थना
हे जगत नियंता- पालनहारी
आन पड़ी हम पर विपदा भारी
सजा दी किस भूल की इतनी भारी
त्राहि-त्राहि कर रही दुनिया सारी।
कठिन परीक्षा की यह घड़ी हमारी
संकट से तारो हे त्रिपुरारी
कहते एकता में बल है भारी
फिर क्यों बिखरी है दुनिया सारी
मानवता के हम हैं पुजारी
पर तुम से बड़ा न कोई उपकारी
साहस-धैर्य अब दुनिया है हारी
तुमसे है बस आस हमारी।
तुम ही हो गिरतों का सहारा
तुम ही हरते संकट सारा
मिलकर रहेंगे हम सब
यह है प्रण हमारा
कोरोना मुक्त कर दो प्रभु
जीवन हमारा।
