STORYMIRROR

Jyoti Nagpurkar

Inspirational

3  

Jyoti Nagpurkar

Inspirational

पंछी

पंछी

1 min
261

फैलायें पंख चली मैं

दाना टिपने बन बन

पाऊँगी उस स्वाद को

चोंच सें मैं चुनचुन


जहाँ धरती हरी भरी

आसमॉं निल श्यामल

झुलाती हैं ये डालीयॉं

हरे पत्ते बनकर ऑंचल


सुनाती है हर लहर

गीत झनक झनक

वो मदभरी कस्तूरी

गंध महक महक


जैसे लुभाता पवन

जीने की लालत भर

सब में मिल भी जाओ

मिले ये सुहाना सफर।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational