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Gurminder Chawla

Abstract


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Gurminder Chawla

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पल भर (कविता )

पल भर (कविता )

1 min 296 1 min 296


पलभर मुझको ज़ीने दो

तेरी यादो से मिलने दो

तू न मिल पाई तो क्या ,

तेरी यादो की महक बिखरने दो

कैसा रंग रूप था तेरा

कैसे नयन थे तेरे ,

खवाबों मे बस खोने दो

हकीकत मे न मिल सकी तुम

बस पल भर आंसू बहने दो

तुम ही मेरे जीवन की कहानी

आज तो उसको पढ़ने दो

पल भर का साथ तो होने दो

जी भरकर आज यादों में सोने दो।


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