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Rinki Raut

Abstract

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Rinki Raut

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पिया

पिया

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बंद दरवाज़ा देखकर

लौटी है दुआ

आंख खुली तो जाना

ख़्वाब और सच है क्या

 

धीमे-धीमे दहक रहे है

आँखों में गुजरे प्यार वाले पल

राख हो कर भी सपने

गर्म है

बुझे आँच की तरह

 

बर्फ में जमे अहसास

मानो धुव में ठहरे

दिन –रात की तरह

 

चुपी ओढे बैठी मैं

चहरे पर सजाए मुस्कुराहट

प्यार का मोती खोया

मन की गहराइयों में जाने कहा

 

बंद दरवाज़ा देखकर

लौटी है दुआ।


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