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Preeti Sharma "ASEEM"

Abstract

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Preeti Sharma "ASEEM"

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फिर... क्यों

फिर... क्यों

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वक्त मिलता जो उन्हें पूछ लेते हाल मेरा ।

यू ही क्यों जा के हाल अपना बताया जाए ।।


उस शहर में ,दूर -दूर तक कोई अपना नहीं ।

फिर किस लिए उस शहर में जाया जाए ।


बड़ी तमन्ना थी ,हम भी आते तेरे शहर में ।

तेरी बेरुखी से कदम एक भी उठाया ना जाए ।।


लोग कहते हैं नेकी कर के बहा दे दरिया में ।

तेरी यादों को दरिया में बहाया ना जाए ।।


उसकी आंखों में एक गहरी कहानी थी ।

जो उसके दिल और चेहरे के जुबानी ना आए।।


हम समझते थे उसे समझ लेंगे।

हमें तो पहली जमात के ही कायदे ना आए।।


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