फिर... क्यों
फिर... क्यों
वक्त मिलता जो उन्हें पूछ लेते हाल मेरा ।
यू ही क्यों जा के हाल अपना बताया जाए ।।
उस शहर में ,दूर -दूर तक कोई अपना नहीं ।
फिर किस लिए उस शहर में जाया जाए ।
बड़ी तमन्ना थी ,हम भी आते तेरे शहर में ।
तेरी बेरुखी से कदम एक भी उठाया ना जाए ।।
लोग कहते हैं नेकी कर के बहा दे दरिया में ।
तेरी यादों को दरिया में बहाया ना जाए ।।
उसकी आंखों में एक गहरी कहानी थी ।
जो उसके दिल और चेहरे के जुबानी ना आए।।
हम समझते थे उसे समझ लेंगे।
हमें तो पहली जमात के ही कायदे ना आए।।
