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Nitu Arora

Tragedy

5.0  

Nitu Arora

Tragedy

पैसा खाऊँ स्कूल

पैसा खाऊँ स्कूल

1 min
320


पहले दस दस बच्चे हुआ करते थे

फिर तीन का जमाना आया

फिर से एक हवा चली

हम दो हमारे दो की लहर चली।

 

अब एक बच्चा ही चाहिए

क्योंकि महँगाई की चाल चली

खाना पीना कम कर दिया

कपड़े सिलाना बन्द कर दिया।


फिर भी महँगी फ़ीस कहाँ से भरेंगे

डाका डाले चोरी करे

स्कूल का पेट कैसे भरे

खा खा के पैसे, स्कूल का पेट भरता नहीं।


अब दो बच्चे हम से पलते नहीं

इस पैसा खाऊँ स्कूलों के दौर में

एक बच्चा ही हमको सरता हैं।


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